मेरा आधार, अब मेरी पहचान - पूर्वी चौधरी
समस्या – यह कहानी एक आठ वर्ष की बच्ची पूर्वी चौधरी की स्थिति को उजागर करती है, जिसके पास न तो जन्म प्रमाणपत्र है और न ही आधार कार्ड। ये दोनों दस्तावेज किसी भी नागरिक की पहचान और अधिकारों के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। इनके अभाव में बच्ची को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी समस्या उसकी शिक्षा से जुड़ी है। स्कूल में प्रवेश के लिए जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य होता है। दस्तावेज़ न होने के कारण बच्ची का दाखिला बार-बार टल रहा है, जिससे उसकी पढ़ाई बाधित हो रही है। इसके अलावा, आधार कार्ड न होने से उसे सरकारी योजना जैसे लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी उसे कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई सरकारी अस्पतालों और योजनाओं में पहचान पत्र आवश्यक होता है, जिसके अभाव में समय पर और उचित इलाज मिलना मुश्किल हो जाता है।
सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी यह स्थिति चिंताजनक है। पहचान न होने से बच्ची का अस्तित्व आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं हो पाता, जिससे भविष्य में उसे रोजगार, बैंक खाता खोलने, या अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने में बाधाएँ आएँगी।
इस समस्या का समाधान आवश्यक है, स्थानीय प्रशासन को ऐसे मामलों में विशेष ध्यान देना चाहिए और सरल प्रक्रिया के माध्यम से जन्म प्रमाणपत्र एवं आधार कार्ड बनवाने में सहायता करनी चाहिए। साथ ही, लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है ताकि वे समय पर अपने बच्चों के दस्तावेज़ बनवा सकें।
निष्कर्षतः, आवश्यक दस्तावेजों का अभाव न केवल बच्ची के वर्तमान को प्रभावित करता है, बल्कि उसके भविष्य को भी संकट में डालता है।
पहल – एक 8 वर्षीय बालिका के लिए पहचान संबंधी दस्तावेज़ों—जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड—का अभाव न केवल उसके अधिकारों में बाधा उत्पन्न करता है, बल्कि उसके शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अवसरों को भी सीमित करता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा आवश्यक प्रक्रिया अपनाकर इन दस्तावेज़ों को बनवाने का कार्य किया गया।
सबसे पहले, बालिका के जन्म प्रमाणपत्र के लिए स्थानीय नगर निगम/ग्राम पंचायत कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया। चूंकि जन्म के समय उसका पंजीकरण नहीं हुआ था, इसलिए विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके अंतर्गत माता-पिता से शपथ पत्र, अस्पताल या दाई द्वारा जारी प्रमाण (यदि उपलब्ध हो), और स्थानीय गवाहों के बयान लिए गए। सभी आवश्यक दस्तावेज़ों के सत्यापन के बाद बालिका का जन्म प्रमाणपत्र जारी किया गया।
इसके पश्चात आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया शुरू की गई। आधार नामांकन केंद्र पर बालिका को उसके माता या पिता के साथ ले जाया गया। चूंकि उसके पास पहले कोई पहचान दस्तावेज़ नहीं था, इसलिए माता-पिता के आधार कार्ड को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया। आधार नामांकन के दौरान उसकी बायोमेट्रिक जानकारी (फोटो और अंगुलियों के निशान) दर्ज की गई और एक नामांकन रसीद प्रदान की गई। कुछ दिनों के भीतर उसका आधार कार्ड भी जारी कर दिया गया।
इन दोनों महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों के बन जाने से बालिका को अब सरकारी योजनाओं, विद्यालय में प्रवेश, और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। यह पहल न केवल उसके वर्तमान जीवन को सशक्त बनाती है, बल्कि उसके भविष्य के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करती है।
