प्रस्तावना
नागरिक अधिकार मंच द्वारा भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती के अवसर पर भव्य एवं प्रेरणादायक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, बच्चों एवं स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समारोह का उद्देश्य बाबा साहब के विचारों, संविधान निर्माण में उनके योगदान तथा सामाजिक समानता, शिक्षा एवं अधिकारों के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के डायरेक्टर श्री शिव कुमार जी के प्रेरणादायक संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर जी भारत के संविधान निर्माता तथा सामाजिक न्याय के महान प्रतीक हैं। आज अनेक राजनीतिक दल उनके नाम एवं विचारों का उपयोग वोट बैंक, नीतियों और छवि सुधार के लिए करते हैं, परंतु यह आवश्यक है कि उनके वास्तविक विचारों—समानता, शिक्षा, अधिकार एवं भेदभाव के अंत—पर भी कार्य किया जाए। उन्होंने बताया कि बाबा साहब केवल अनुसूचित जाति या पिछड़े वर्ग के नेता नहीं थे, बल्कि महिलाओं सहित समाज के सभी वर्गों के अधिकारों के लिए कार्यरत रहे। संविधान के कारण ही भारत में श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी राष्ट्रपति बन सकीं तथा महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त हुए।
माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि
इसके पश्चात श्री शिव कुमार जी के नेतृत्व में सभी उपस्थित साथियों, युवाओं, महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों द्वारा डॉ. अंबेडकर जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
सांस्कृतिक कार्यक्रम
युवा समूह (कविता, रिया, ज्योति, ईशा, रियान, आशी, यामिनी, महक, श्रुति एवं शिवानी) द्वारा “आजादी” गीत की सुंदर प्रस्तुति दी गई तथा आकर्षक नृत्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों ने समारोह में उत्साह एवं ऊर्जा का संचार किया।
मीडिया कवरेज
कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों के न्यूज़ बाइट भी लिए गए, जिससे समारोह का संदेश व्यापक स्तर तक पहुँच सके।
विशेष गायन प्रस्तुति
समारोह में प्रसिद्ध सत्संग गायक श्री डब्बल कबीर जी का मंच पर स्वागत किया गया। उन्होंने डॉ. अंबेडकर जी एवं संविधान की महत्ता पर आधारित प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत किए, जिनमें प्रमुख रूप से:
- अगर बाबा तुम न होते
- संविधान की चाबी
- संविधान दे गयो भीमा को लालइन गीतों के माध्यम से उन्होंने समझाया कि बाबा साहब ने संविधान रूपी चाबी देकर देशवासियों की किस्मत के ताले खोले हैं।
श्री अरविंद श्रीवास्तव जी
उन्होंने बाबा साहब की 135वीं जयंती पर सभी को शुभकामनाएँ दीं। कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने देश और वंचित समाज के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। उन्होंने शोषित और पिछड़े वर्गों को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिलाया। बाबा साहब ने ऐसा संविधान दिया जिसमें सभी को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार मिला। उन्होंने कहा कि लोग आज जयंती तो मनाते हैं, पर उनके विचारों को पढ़ना और समझना भी आवश्यक है। केवल उत्सव मनाने से समाज में बदलाव नहीं आएगा। हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज सेवा करनी चाहिए। संविधान की रक्षा करना ही बाबा साहब को सच्ची श्रद्धांजलि है।
श्री देवेश चौधरी जी
उन्होंने कहा कि आज भी समाज में कई स्थानों पर भेदभाव देखने को मिलता है, जिसे समाप्त करना आवश्यक है। बाबा साहब की जयंती विश्व के अनेक देशों में मनाई जाती है, जो उनके महान व्यक्तित्व का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि संविधान को बचाना और मजबूत करना हम सभी की जिम्मेदारी है। आज कुछ लोग बिना ज्ञान के संविधान पर टिप्पणी करते हैं, जो उचित नहीं है। भारत अनेक धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों वाला देश है। यही विविधता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि समाज में समानता और भाईचारा बना रहेगा तो देश आगे बढ़ेगा। हमें बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुँचाना चाहिए।
श्री रामरतन यादव जी
उन्होंने कहा कि हमारे महापुरुषों ने समाज को जो रोशनी दी, उसी मार्ग पर बाबा साहब ने संघर्ष किया। उन्होंने समाज के दबे-कुचले लोगों को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। बाबा साहब की देन से आज समाज को अधिकार और सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि बदलाव के लिए सभी लोगों को मिलकर कार्य करना होगा। हमें संकल्प लेना चाहिए कि उनके बताए मार्ग पर चलें। बच्चों को अच्छी शिक्षा देना सबसे बड़ा कर्तव्य है। शिक्षित समाज ही मजबूत समाज बन सकता है। बाबा साहब का जीवन संघर्ष और प्रेरणा का प्रतीक है।
श्री यमेश चौधरी जी
उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में बाबा साहब की लोकप्रियता और सम्मान बढ़ रहा है। लेकिन भारत में आज भी पिछड़ा वर्ग कई स्थानों पर शिक्षा और अवसरों से वंचित है। युवाओं को नशे और बुराइयों से दूर रहना चाहिए। समाज को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने कहा कि लोग बाबा साहब को पूजते हैं, पर उन्हें पढ़ने की भी आवश्यकता है। ज्योतिबा फुले और बाबा साहब ने समाज में शिक्षा की ज्योति जलाई। आज हमें उनके मिशन को आगे बढ़ाना चाहिए। ज्ञान और जागरूकता से ही समाज सशक्त बनेगा।
श्री अरविंद चौधरी जी
उन्होंने कहा कि आज लोग बाबा साहब को मानते हैं, लेकिन उनके रास्ते पर नहीं चलते। समाज में दो प्रकार के नशे बढ़ रहे हैं—अंधविश्वास और नशीले पदार्थों का नशा। युवाओं को इन दोनों से दूर रहना चाहिए। नशा व्यक्ति, परिवार और समाज को कमजोर करता है। हमें अपने समाज को जागरूक बनाना होगा। शिक्षा, अनुशासन और मेहनत से ही उन्नति संभव है। उन्होंने कहा कि अपने उत्थान के लिए सभी को स्वयं आगे आना होगा। बाबा साहब का मार्ग ही समाज को प्रगति की ओर ले जा सकता है।
दादा बैद्यनाथ जी
उन्होंने कहा कि आज मंच से सभी अतिथियों ने बहुत प्रेरणादायक विचार रखे हैं। यदि उन बातों में से कुछ बातों को भी जीवन में उतार लिया जाए तो बड़ा परिवर्तन संभव है। हमें अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शिक्षित पीढ़ी ही समाज का भविष्य बदल सकती है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया था। हमें समाज में एकता और जागरूकता बढ़ानी चाहिए। अच्छे संस्कार और शिक्षा से परिवार मजबूत बनता है। बाबा साहब के विचार आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा हैं
श्री अरविंद चौधरी जी उन्होंने कहा कि आज लोग बाबा साहब को मानते हैं, लेकिन उनके रास्ते पर नहीं चलते। समाज में दो प्रकार के नशे बढ़ रहे हैं—अंधविश्वास और नशीले पदार्थों का नशा। युवाओं को इन दोनों से दूर रहना चाहिए। नशा व्यक्ति, परिवार और समाज को कमजोर करता है। हमें अपने समाज को जागरूक बनाना होगा। शिक्षा, अनुशासन और मेहनत से ही उन्नति संभव है। उन्होंने कहा कि अपने उत्थान के लिए सभी को स्वयं आगे आना होगा। बाबा साहब का मार्ग ही समाज को प्रगति की ओर ले जा सकता है।
दादा बैद्यनाथ जी उन्होंने कहा कि आज मंच से सभी अतिथियों ने बहुत प्रेरणादायक विचार रखे हैं। यदि उन बातों में से कुछ बातों को भी जीवन में उतार लिया जाए तो बड़ा परिवर्तन संभव है। हमें अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शिक्षित पीढ़ी ही समाज का भविष्य बदल सकती है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया था। हमें समाज में एकता और जागरूकता बढ़ानी चाहिए। अच्छे संस्कार और शिक्षा से परिवार मजबूत बनता है। बाबा साहब के विचार आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा हैं
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छात्र सम्मान और पुरस्कार वितरण
मुख्य अतिथियों के संबोधन के बाद, संस्था ने मंच पर कक्षा 10 और 12 के उन मेधावी छात्रों को सम्मानित किया—जो ‘डॉ. बी.आर. अंबेडकर छात्रवृत्ति’ के पात्र थे—और उन्हें उनकी छात्रवृत्तियाँ प्रदान कीं। इसके अतिरिक्त, ‘जलवायु परिवर्तन’ विषय पर आधारित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कार वितरित किए गए। मंच पर नृत्य प्रस्तुतियाँ देने वाले सभी बच्चों को भी सम्मानित किया गया।
समापन समारोह
पुरस्कार वितरण के बाद, श्री राजेंद्र चौधरी ने समापन संबोधन दिया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और नागरिकों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। अपने संबोधन में, उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्श आज भी समाज के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश का काम करते हैं। बाबासाहेब द्वारा शिक्षा, समानता और अधिकारों के जो संदेश दिए गए थे, वे आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमें संविधान की गरिमा और अपने लोकतंत्र की मज़बूती को बनाए रखने के लिए सदैव सजग रहना चाहिए। समाज में भाईचारा, न्याय और समान अवसरों को बढ़ावा देना हम सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ें और राष्ट्र-निर्माण के कार्य में अपना योगदान दें। उन्होंने सभी से बाबासाहेब द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आग्रह किया। अंत में, उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी को अपनी शुभकामनाएँ दीं।
