Chaupal- A discussion on the problems of laborers

परिचय

नागरिक अधिकार मंच द्वारा Urban Poverty Program के अंतर्गत दिनांक 23 जनवरी 2026 को एक चौपाल बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में कार्यरत असंगठित श्रमिकों (पुरुष एवं महिला) को उनके अधिकारों, श्रम कानूनों एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी प्रदान करना तथा उनके प्रश्नों और शंकाओं का समाधान करना था।

यह कार्यक्रम अज़ीम प्रेमजी संस्था के सहयोग से मदन महल स्थित होटल द गैलेक्सी में आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में सुभाष नगर, बगिया टोला (रांझी), दुर्गा नगर, बड़गा दफाई, दमोह नाका, चेरिटल, क्रेशर बस्ती सहित अन्य बस्तियों से मजदूर एवं महिलाएँ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत एवं पंजीकरण प्रक्रिया

कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिभागियों के रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) से की गई। इसमें उपस्थित सभी असंगठित श्रमिकों का नाम, पता, कार्य का प्रकार एवं संपर्क विवरण दर्ज किया गया। पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान प्रतिभागियों को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रूपरेखा से अवगत कराया गया।

प्रतिभागियों के साथ संवाद सत्र

पंजीकरण के पश्चात कोऑर्डिनेटर पूजा भुर्रक जी द्वारा प्रतिभागियों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों से प्रश्न किए, जैसे—

  • आप इस बैठक में क्यों आए हैं?
  • इस चौपाल बैठक का क्या उद्देश्य आप समझते हैं?
  • संगठित एवं असंगठित मजदूर के बारे में आप क्या जानते हैं?

साथ ही प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि आज के सत्र में वे अपने सभी संदेह, भ्रम एवं प्रश्न स्पष्ट कर सकते हैं तथा श्रम विभाग से आए अतिथियों से सीधे जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अतिथियों एवं कार्यक्रम का परिचय

इसके पश्चात कोऑर्डिनेटर पूजा भुर्रक जी द्वारा नागरिक अधिकार मंच के निदेशक श्री शिव कुमार चौधरी जी को आमंत्रित किया गया।
श्री शिव कुमार चौधरी जी ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि, उद्देश्य तथा संस्था के कार्यों के बारे में जानकारी दी और मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया।

मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत

इस चौपाल बैठक में मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में निम्न अधिकारी उपस्थित रहे—

  • श्री धर्मवीर मौर्य जी, सेंट्रल लेबर ऑफिस
  • श्री शैलेंद्र जैन जी, सेंट्रल लेबर ऑफिस
  • श्री आशुतोष शर्मा जी, सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय
  • श्री राजकुमार सिन्हा जी, लेखक (सामाजिक मुद्दे)

सभी अतिथियों का फ्लावर पॉट एवं सम्मान सामग्री भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।

विशेष संवाद

  • श्री शिव कुमार चौधरी जी का संबोधन

कार्यक्रम के इस सत्र में नागरिक अधिकार मंच के   शिव कुमार चौधरी जी ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने संगठित एवं असंगठित मजदूर की परिभाषा को सरल शब्दों में समझाया और बताया कि देश की बड़ी आबादी असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है, लेकिन फिर भी वे स्वयं को मजदूर मानने से कतराते हैं। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों से प्रश्न किया कि जिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों को वे चुनते हैं, क्या उन्हें यह जानकारी है कि सरकार की ओर से उन्हें कितनी पेंशन एवं अन्य क्या  सुविधाएँ मिलती हैं? उन्होंने यह भी बताया कि कुछ वर्गों को एक से अधिक पेंशन सुविधाएँ प्राप्त होती हैं, जबकि कई अन्य सरकारी सेवाओं में पेंशन की व्यवस्था नहीं है।

आपने  ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि 7–8 हजार रुपये की निजी नौकरी करने वाले लोग भी स्वयं को मजदूर नहीं मानते, जबकि वे भी असंगठित श्रमिक की श्रेणी में आते हैं और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने वर्तमान युवाओं की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज का युवा धार्मिक एवं राजनीतिक जुलूसों में तो शामिल होता है, लेकिन काम, मजदूरी और अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में भागीदारी कम करता है। उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से मजदूर अपने अधिकारों से ही अनजान हैं। इसी उद्देश्य से आज के इस कार्यक्रम में श्रम विभाग के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है, ताकि श्रमिकों के संदेह दूर हों और उनकी जानकारी में वृद्धि हो। यह कहते हुए उन्होंने श्री धर्मवीर मौर्य जी एवं श्री शैलेंद्र जैन जी का स्वागत किया और उन्हें मंच पर आकर अपनी जानकारी साझा करने के लिए आमंत्रित किया।

  • श्री धर्मवीर मौर्य जी का संबोधन

इसके पश्चात श्री धर्मवीर मौर्य जी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए संगठित एवं असंगठित मजदूरों का अर्थ स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 90–93 प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं।

उन्होंने श्रमिकों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी, जिनमें—

  • श्रम कल्याण योजनाएँ
  • बीड़ी एवं खदान श्रमिक योजनाएँ
  • श्रम योगी मानधन योजना

शामिल हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि मजदूरों के लिए निःशुल्क डिस्पेंसरी की सुविधा उपलब्ध है, जहाँ टीबी, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में सहायता तथा ओपीडी सेवाओं का लाभ मिलता है।

     »    सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर विस्तृत जानकारी

श्री मौर्य जी ने छात्रवृत्ति योजना एवं श्रमोदय विद्यालय के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में जाकर इन योजनाओं के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य न

उन्होंने श्रम योगी मानधन योजना का महत्व समझाते हुए उसकी गणना प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझाया। साथ ही उन्होंने ई-श्रम पोर्टल पर सभी असंगठित मजदूरों के पंजीकरण की अनिवार्यता पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने बताया कि ई-श्रम पंजीकरण से सरकार को असंगठित श्रमिकों का सटीक डेटा प्राप्त होता है, जिससे भविष्य में अधिक से अधिक मजदूरों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाया जा सकता है।

  • श्री शैलेंद्र जैन जी :

इसके पश्चात श्रम विभाग से श्री शैलेंद्र जैन जी को आगे की जानकारी साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया। अपने संवाद में उन्होंने सर्वप्रथम संस्था का आभार व्यक्त किया कि इस महत्वपूर्ण विषय पर उन्हें एक सशक्त माध्यम प्रदान किया गया। उन्होंने संगठित एवं असंगठित श्रमिकों के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि विभिन्न प्रकार के कार्य करने वाले श्रमिक किस श्रेणी में आते हैं। इसके बाद उन्होंने मानधन पेंशन योजनाओं की जानकारी देते हुए पेंशन की राशि, पात्रता मानदंड एवं आवश्यक दस्तावेजों पर प्रकाश डाला। साथ ही जीवन ज्योति बीमा योजना एवं जीवन सुरक्षा योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभ, पात्रता एवं किन परिस्थितियों में सहायता प्राप्त होती है, यह भी विस्तार से समझाया। उन्होंने आगे बताया कि सरकार द्वारा 13 मंत्रालयों के माध्यम से लगभग 143 प्रकार की छात्रवृत्तियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिक परिवारों एवं वंचित वर्गों को शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी शंकाओं का समाधान किया, जिससे संवाद और अधिक प्रभावी एवं सहभागितापूर्ण बन सका।

  • श्री आशुतोष शर्मा जी :

श्री आशुतोष जी ने अपने संबोधन में विभिन्न सरकारी योजनाओं की उपलब्धता के बावजूद श्रमिकों द्वारा उनका लाभ न ले पाने के कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि योजनाओं को लोगों तक पहुँचाने के लिए शिविर लगाए जाते हैं और निरंतर प्रयास भी किए जाते हैं, किंतु जागरूकता की कमी, अधूरे या अपडेट न किए गए दस्तावेज तथा केवाईसी न होना एक बड़ी बाधा बनते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने दस्तावेजों की जाँच कर उन्हें अद्यतन कराने एवं केवाईसी पूर्ण कराने का आग्रह किया तथा आश्वासन दिया कि बीओसीडब्ल्यू, ई-श्रम अथवा अन्य किसी भी पंजीकरण में यदि कोई समस्या आती है तो वे नागरिक अधिकार मंच के माध्यम से सहयोग प्रदान करेंगे और आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी करवाई जाएँगी।

उन्होंने आगे श्रमोदय स्कूलों की जानकारी देते हुए बताया कि इनमें प्रवेश कब और कैसे किया जाता है। साथ ही बीओसीडब्ल्यू के अंतर्गत पात्रता संबंधी आवश्यक जानकारी साझा की और श्रमिकों को संगठित होकर संगठन बनाने की सलाह दी। उन्होंने ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण को आवश्यक बताते हुए कहा कि इससे श्रमिकों का रिकॉर्ड सरकार के पास अपडेट रहता है और योजनाओं तक पहुँच आसान होती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने लोक सेवा केंद्रों का उपयोग करने का सुझाव दिया। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी शंकाओं का समाधान किया, जिससे सत्र उपयोगी एवं सहभागितापूर्ण रहा।

  • श्री राजकुमार सिन्हा जी :

राजकुमार सिन्हा जी, लेखक एवं सामाजिक मुद्दों पर लेखन करने वाले सामाजिक चिंतक, ने अपने संबोधन में शहरी श्रमिकों की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शहरी श्रमिक अपनी परिस्थितियों को समझना और उन पर संवाद करना चाहते हैं, जिसके लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कल्याण बोर्डों का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार योजनाएँ तो बनाती है, लेकिन असंगठित श्रमिक संगठन के अभाव में उनका लाभ नहीं ले पाते। उन्होंने असंगठित श्रमिकों के लिए एक सशक्त मंच एवं यूनियन के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने मछली श्रमिकों के संगठन का उदाहरण दिया, जहाँ संगठित प्रयासों से मजदूर सशक्त होकर आगे बढ़ सके। अंत में उन्होंने संविधान और सरकारी योजनाओं की समझ के साथ सामूहिक प्रयासों द्वारा जीवन स्तर सुधारने का आह्वान किया, जिससे यह सत्र प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम समापन

कार्यक्रम के अंत में संस्था के डायरेक्टर श्री शिव कुमार जी द्वारा प्रतिभागियों के साथ संवाद किया गया। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा बीओसीडब्ल्यू, संबल योजना, ई-श्रम सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित शिविर आयोजित किए गए हैं, ताकि श्रमिकों एवं समुदाय के लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई बार शिविरों के बावजूद लाभ इसलिए नहीं मिल पाता क्योंकि लोगों के दस्तावेज पूर्ण नहीं होते या केवाईसी प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए संस्था निरंतर प्रयास कर रही है कि अपने माध्यम से दस्तावेजों को पूर्ण कराया जाए, केवाईसी करवाई जाए और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुँच सके।

उन्होंने आगे बताया कि श्रमिकों को संगठित करने और उनके संगठन निर्माण की दिशा में भी संस्था लगातार कार्य कर रही है, ताकि सामूहिक रूप से उनकी समस्याओं का समाधान संभव हो सके। अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों से कहा कि यदि उन्हें किसी भी योजना या विषय से संबंधित और जानकारी चाहिए या कोई शंका है, तो वे निःसंकोच अपने प्रश्न रख सकते हैं। इसके पश्चात कार्यक्रम को समापन की ओर ले जाया गया, जिसमें सभी अतिथियों को टोकन ऑफ थैंक्स के रूप में डायरी एवं पेन भेंट किए गए। प्रतिभागियों से फीडबैक प्राप्त कर कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।

परिणाम

  • शहरी असंगठित श्रमिकों को श्रम कानूनों एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की स्पष्ट और व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई।
  • ई-श्रम, बीओसीडब्ल्यू, पेंशन, बीमा एवं छात्रवृत्ति योजनाओं से जुड़ने की प्रक्रिया समझ में आई।
  • प्रतिभागियों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई।
  • दस्तावेज़ पूर्ण करने एवं केवाईसी अपडेट कराने के महत्व को श्रमिकों ने समझा।
  • श्रमिकों के संगठन एवं सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर सकारात्मक समझ विकसित हुई

Bottom of Form

निष्कर्ष :

यह चौपाल बैठक शहरी असंगठित श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल सिद्ध हुई। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को श्रम कानूनों, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, पेंशन, बीमा, छात्रवृत्ति, ई-श्रम पंजीकरण, बीओसीडब्ल्यू एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। संवाद सत्रों के दौरान श्रमिकों की शंकाओं का समाधान किया गया, जिससे उनमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ा।

कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि योजनाओं का लाभ न मिल पाने का मुख्य कारण जागरूकता की कमी, अधूरे दस्तावेज एवं केवाईसी की समस्या है, जिस पर संस्था द्वारा निरंतर सहयोग और प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही संगठित होने, यूनियन/संगठन निर्माण और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता को सभी वक्ताओं ने रेखांकित किया। कुल मिलाकर यह चौपाल बैठक श्रमिकों को सशक्त बनाने, सरकारी योजनाओं से जोड़ने और उनके सामाजिक–आर्थिक उत्थान की दिशा में एक प्रभावी कदम रही, जो भविष्य में ऐसे और कार्यक्रमों की आवश्यकता एवं प्रासंगिकता को दर्शाती है।

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