
दिनांक 5 जुलाई २०२४ को एक मांगपत्र के माध्यम से बताया गया की म .प्र. शासन के आदेशानुसार बहुत जल्द ही मध्य प्रदेश के तीन बड़े शहरों भोपाल, इंदौर और जबलपुर का मास्टर प्लान जारी करने की घोषणा की गई है जिसमें कहा गया है कि इन शहरों का मास्टर प्लान जनता की राय लेकर बनाया जाएगा। जबलपुर शहर का मास्टर प्लान 2011 के बाद नहीं बनाया गया है जिसके कारण शहर को चलाने वाले गरीब तबके के साथ बेगाना जैसा व्यवहार किया जाता रहा है नतीजन उन्हें कभी भी कहीं भी फेंक दिया जाता है। विकास की इस पूरी यात्रा में जबलपुर शहर के गरीब सबसे बड़ी कुर्बानी देते रहे हैं। 2024 में फिर से जबलपुर का मास्टर प्लान बनाया जाना है जिसमें यह तय किया जाएगा कि भविष्य में शहर में कौन कहां रहेगा? और शहर की कौन सी जमीन का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा। पिछले मास्टर प्लान में शहर में गरीबों की स्थिति को स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं किया गया था और उनके लिए कोई जमीन आरक्षित नहीं की गई थी इसलिए इस ज्ञापन के माध्यम से हम जबलपुर के आगामी मास्टर प्लान में निम्नलिखित मांगों को शामिल करने की अपील करते हैं – 1. जबलपुर शहर के आगामी मास्टर प्लान में जबलपुर की सभी बस्तियों के नाम दर्ज किए जाएं। 2. जबलपुर शहर के आगामी मास्टर प्लान में कौन सी बस्ती कहाँ स्थित है, इसका चिन्हांकन किया जाए। 3. मप्र पट्टा अधिनियम 1984 के अंतर्गत गरीबों को वितरित की जाने वाली भूमि का चिन्हांकन जबलपुर शहर के आगामी मास्टर प्लान में किया जाए। 4. जबलपुर शहर के आगामी मास्टर प्लान में यथासंभव आबादी वाले स्थानों का चिन्हांकन किया जाए। 5. बस्तियों के समग्र विकास में 74वें संविधान संशोधन 1992 की भूमिका को मास्टर प्लान में स्पष्ट किया जाए।